सोमवार, 16 मई 2016

लक्ष्य साधना

गुरू द्वारा उपदेशित ब्रम्ह के रहस्य से यह विदित होता है कि इस रूप संसार में ब्रम्ह की प्रकृति ही ब्रम्ह की महिमा से समस्त रूपों में विस्तरित है । इन समस्त विस्तरित रूपों के लिये उभयनिष्ठ लक्ष्य यह होता है कि उस ब्रम्ह में ही विलय की स्थिति तक पहुँच सकें । इसी लक्ष्य की प्राप्ति का पथ भाँति-भाँति से प्रगट किये हैं । इस यज्ञ कर्म में यज्ञ ब्रम्ह है, कर्ता ब्रम्ह है, आहुति ब्रम्ह है, ग्रहणकर्ता अग्नि ब्रम्ह है । यह रूप चित्र धारण करना ही ब्रम्ह को जानना है । 

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