भगवद्गीता
मंगलवार, 17 मई 2016
पिता माता रक्षक
ब्रम्ह का रहस्य बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से कहे कि मैं ही इस रूप संसार का पिता हूँ
,
मैं ही इसकी माता हूँ
,
मैं ही इसे अपने रूप में स्थिर रखने का अवलम्ब हूँ
,
मैं ही इन रूपों के लिये ज्ञेय रहस्य हूँ
,
मैं ही अक्षर ॐ नाद हूँ ।
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