गुरू द्वारा बताये गये पुण्यात्मा संतों की विशिष्ट पैनी उपासना
विधि के वृतांत में प्रयुक्त “ ज्ञानत्व,
भक्त्या, नित्ययुक्त: “ यह इंगित करते हैं
कि ब्रम्ह में समाहित स्थित के यह तीनों ही पर्याय स्वरूप हैं । ब्रम्ह का रहस्य
मस्तिष्क में स्पष्ट रहना, ब्रम्ह की सेवा में आदर पूर्वक
समर्पित रहना, ब्रम्ह के भाव से युक्त रहकर कार्य
में संलग्न होना प्रतिपल ब्रम्ह में समाहित रहना है ।
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