शुक्रवार, 6 मई 2016

ज्ञानत्व भक्तया नित्ययुक्त:

गुरू द्वारा बताये गये पुण्यात्मा संतों के उपासना विधि और वृतांत में तीन प्रधान वाँक्षनाये जिनके प्रभाव से उनकी उपासना ब्रम्ह को उनके प्रति आकृष्ट होने पर बाध्य करती हैं की गणना में प्रथम ज्ञान से ओतप्रोत रहते हुये अर्थात ब्रम्ह के रहस्य को सतत अपनी धारणा मे स्थिर किये हुये द्वितीय भक्तया अर्थात भक्ति के भाव से सतत युक्त रहकर तृतीय नित्ययुक्त: सतत ब्रम्ह के साथ जुडे हुये रहकर उपासना करना बताया गया है । 

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