भगवद्गीता
सोमवार, 30 जनवरी 2017
अर्जुन की अभिव्यक्ति : चरण 1
अर्जुन कहता है कि हे देव मैं आपके मुखमें मैं सभी देवताओं को देख रहा हूँ और सभी जीवों के मेज़बान को भी देख रहा हूँ
,
ब्रम्हा सृजनकर्ता को कमल के आसन पर आरूढ देख रहा हूँ और सभी संतों एवं देवालय के नागाओं को देख रहा हूँ ।
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