भगवद्गीता
सोमवार, 2 जनवरी 2017
दर्शन का विनय
अर्जुन अपने विनय को पूर्ण करते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण से कहता है कि यदि आप यह समझते हैं कि आपके दिव्यरूप का दर्शन मुझे मिल सकता है तो कृपा पूर्वक आप मुझे अवश्य दर्शन कराइये ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें