मंगलवार, 31 जनवरी 2017

दृष्य का स्वरूप

गुरू द्वारा अनुग्रहपूर्वक अर्जुन को कराये गये दिव्यरूप के दर्शन में देवों का स्वरूप अर्जुन को इस सांसारिक सुख दु:ख की परिधि से ऊपर उठा वृहद मानसिक ग्राह्यता की स्थिति का अनुभव कराते हैं । ब्रम्ह की माया का विस्तार समस्त ब्रम्हाण्ड में है जिसका यह भू-लोक एक छोटा सा खण्ड मात्र है । अर्जुन दिव्य स्वरूप में समस्त ब्रम्हाण्ड के विभिन्न स्वरूपों का दर्शन करता है । 

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