गुरू द्वारा अनुग्रहपूर्वक अर्जुन
को कराये गये दिव्यरूप के दर्शन में देवों का स्वरूप अर्जुन को इस सांसारिक सुख
दु:ख की परिधि से ऊपर उठा वृहद मानसिक ग्राह्यता की स्थिति का अनुभव कराते हैं ।
ब्रम्ह की माया का विस्तार समस्त ब्रम्हाण्ड में है जिसका यह भू-लोक एक छोटा सा
खण्ड मात्र है । अर्जुन दिव्य स्वरूप में समस्त ब्रम्हाण्ड के विभिन्न स्वरूपों का
दर्शन करता है ।
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