भगवद्गीता
सोमवार, 16 जनवरी 2017
एकीकृत
गुरू दिव्य दर्शन के विस्तार को और आगे बताते हुये जिज्ञासु अर्जुन से कहे कि हे गुणाकेश अर्जुनतुम समस्त चल और अचल रूपों को मेरी शरीर में एकीकृत रूप में देखो जिसे आप देखना चाहते हो ।
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