बुधवार, 18 जनवरी 2017

दृष्य शक्ति

गुरू दिव्य दर्शन का प्रारूप बताने के उपरांत जिज्ञासु अर्जुन को बताये कि हे अर्जुन तुम यह सब कुछ अपनी इन आँखों से नहीं देख सकोगे क्योंकि इन आँखो में यह सबकुछ देखने की क्षमता नहीं है । इसलिये मैं तुम्हे दिव्य चक्छु  प्रदान करता हूँ जिससे तुम यह सबकुछ देख सकॉग़े । 

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