गुरू दिव्य दर्शन का प्रारूप बताने
के उपरांत जिज्ञासु अर्जुन को बताये कि हे अर्जुन तुम यह सब कुछ अपनी इन आँखों से
नहीं देख सकोगे क्योंकि इन आँखो में यह सबकुछ देखने की क्षमता नहीं है । इसलिये
मैं तुम्हे दिव्य चक्छु प्रदान करता हूँ
जिससे तुम यह सबकुछ देख सकॉग़े ।
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