भगवद्गीता
रविवार, 22 जनवरी 2017
रूपांतरण
गुरू द्वारा सर्वोच्च ईश्वरीय रूप को प्रगट करना वास्तविकता में अपने रूप का रूपांतरण है जिसके प्रभाव से जिज्ञासु अर्जुन गुरू के रूपांतरित रूप में सकल भू-मण्डल तथा स्वर्ग लोक के समस्त रूपों का एकीकृत एक रूप में दर्शन करता है ।
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