दिव्य स्वरूप का दर्शन वास्तविकता
में भूतकाल, वर्तमानकाल, और भविष्य काल को एकीकृत एक समयस्थल पर
अनुभवकरने का वृतांत है । यह एक अनुभूति है । मनुष्य की कल्पना शक्ति का परिचायक
है । यह भूत, वर्तमान और भविष्य को एकीकृत वर्तमान
में देखना है अनुभव करना है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें