भगवद्गीता
बुधवार, 25 जनवरी 2017
दृष्य का वृतान्त सतत्
संजय दिव्य स्वरूप का वृतांत राजा को बताते हुये आगे कहता है कि सभी ईश्वरीय माला और परिधान पहने हुये
,
ईश्वरीय सुगंध को लगाये हुये ईश्वरीय विलेप को लगाये हुये अनेकानेक चमत्कारिक क्षवि में दीप्तिमान सीमारहित आयाम में सभी दिशाओं में मुख किये हुये हैं ।
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