भगवद्गीता
शुक्रवार, 27 जनवरी 2017
दृष्टा अर्जुन
संजय दिव्य स्वरूप का वृतांत राजा को आगे बताते हूये वृतांत को संकलित करते हुये कहता है कि पाण्डव अर्जुन पूरे ब्रम्हाण्ड के विविध रूपों को संकलित हुये एक स्थल देवों के देव गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण के मुख में देखता है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें