संस्कृत में “रूद्र” को ऋगवेद में
वर्णित देवता बताया गया है । ये देवता वायु के प्रचण्ड तूफानों तथा बन एवं पहाड के
विस्तृत सुनसान क्षेत्रके अधिपति होते हैं । ऋगवेद में “रूद्र” शब्द का प्रयोग
“गरजने वाले” और “प्रचण्डतम से भी प्रचण्ड” के रूप में किया गया है । यजुर्वद में “रूद्रम”
जो कि “रूद्र” को प्रसन्न करने का मंत्र गायन वर्णित है वह शैव-धर्म सम्प्रदाय का
महत्वपूर्ण मंत्र है ।
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