भगवद्गीता
गुरुवार, 26 जनवरी 2017
डृष्य का वृतांत लगातार
संजय दिव्य स्वरूप का वृतांत राजा को आगे बताते हुये कहता है कि कंचिद हज़ार सूर्य का प्रकाश एक साथ आकाश में व्याप्त हो जाय तो सम्भव है कि उस दिव्य स्वरूप की भव्यता की तुलना कर सके ।
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