बुधवार, 12 जुलाई 2017

मनोवेगों से अप्रभावित

त्रिगुणातीत के स्वरूप को आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण बोले त्रिगुणातीत व्यक्ति मान और अपमान की दशाओं में समान व्यवहार करता है, वह मित्र और शत्रु के साथ एक समान व्यवहार करता है, वह किसी इच्छाजनित कार्य को करने को प्रेरित नहीं होता है ऐसे व्यक्ति को त्रिगुणातीत कहा जाता है । 

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