त्रिगुणातीत के स्वरूप को आगे बताते
हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण बोले त्रिगुणातीत व्यक्ति मान और अपमान की दशाओं में
समान व्यवहार करता है, वह मित्र और शत्रु के साथ एक समान
व्यवहार करता है, वह किसी इच्छाजनित कार्य को करने
को प्रेरित नहीं होता है ऐसे व्यक्ति को त्रिगुणातीत कहा जाता है ।
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