शनिवार, 15 जुलाई 2017

करुणा हेतु

गुरू ने उपदेश किया कि “मैं अक्षर और अनश्वर ब्रम्ह के, शाश्वत् धर्म और परम् आनंद का निवास स्थान हूँ” । आदिशंकर गुरू के उपरोक्त कथन का अर्थ व्यक्त करते हुये बताये “परमेश्वर इस अर्थ में ब्रम्ह हैं कि वह ब्रम्ह का अव्यक्त रूप हैं । ब्रम्ह अपने भक्तों पर अपनी करुणा ईश्वर-भक्ति के द्वारा दिखाता है और वह परमेश्वर व्यक्त शक्ति है और इसलिये वह स्वयं ब्रम्ह ही है” ।

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