अनश्वर अश्वत्थ (पीपल वृक्ष) के
सम्बंध में आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि इसकी
शाखायें ऊपर और नीचे फैली हुई है, जिसका पोषण गुणों द्वारा होता है ।
इसकी टहनियाँ इंद्रियों के विषय हैं और नीचे मनुष्य लोक में इसकी जडे फैली हुई हैं, जिसके परिणामस्वरूप कर्म होते हैं ।
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