मंगलवार, 18 जुलाई 2017

उर्ध्वमुख जडे

संसार वृक्ष का यह स्वरूप बताया जाता है । समस्त रूप नाम की उत्पत्ति एक ब्रम्ह से है । इस प्रकार समस्त फैले हुये रूप और नाम उस वृक्ष के विस्तार के समान हैं जिसकी उत्पत्ति उस ब्रम्ह से है । रूप और नाम की उत्पत्ति ब्रम्ह से है इसलिये जडों की कल्पना ऊपर की ओर की गई है जबकि फैला हुआ नाम रूप इसका विस्तार है जो कि नीचे है । अतिप्राचीन मान्यताओं के अनुसार इस संसार का पालन वैदिक उपासनाओं पर लम्बित होता है इसलिये इन्हें संसार वृक्ष की पत्तियों के समान बताया गया हैं जो कि वृक्ष और शाखाओं को सन्युक्त और जीवित रखता है ।

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