भगवद्गीता
शुक्रवार, 14 जुलाई 2017
ईश्वर ब्रम्ह
अखण्ड भक्ति से युक्त होकर गुरू स्वरूप साक्षात् ब्रम्ह की सेवा का रहस्य बताते हुये गुरु योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि मैं अक्षर और अनश्वर ब्रम्ह के
,
शाश्वत धर्म और परम् आनंद का निवास स्थान हूँ ।
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