पक्की ज़डों वीले अश्वत्थ (पीपल
वृक्ष) को अनासक्ति की दृढ तलवार से काटकर को आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर
श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि तब यह कहते हुये कि “मैं उस आद्य पुरुष में शरण लेता
हूँ, जिससे यह विश्व की प्राचीन धारा
निकली है” उस मार्ग को खोज करनी चाहिये,
जिसपर गये हुये लोग फिर वापस नहीं लौटते ।
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