भगवद्गीता
गुरुवार, 27 जुलाई 2017
धारण और त्याग
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जब ईश्वर शरीर धारण करता है और जब वह शरीर को छोडता है
,
तब वह इन (इंद्रियों और मन) को साथ ले जाता है
,
जैसे कि वायु सुगंधों को उनके स्थान से ले जाती है ।
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