भगवद्गीता
सोमवार, 24 जुलाई 2017
संसार धारा
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुनको बताये कि मेरा अपना ही एक अंश नित्य जीव बनकर जीवन के संसार में पाँच इंद्रियों और उनके साथ छठे मन को
,
जो कि प्रकृति मे स्थित हैं
,
अपनी ओर खींच लेता है ।
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