गुरुवार, 6 जुलाई 2017

त्रिगुणों से परे

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि आत्मा जब गुणों के अध्यास, जो कि प्रकृति से उत्पन्न हुये है, से मुक्त हो जाती है, तो वह जीव जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें