शनिवार, 8 जुलाई 2017

त्रिगुणातीत की जिज्ञासा

गुरू के उपदेश को सुनकर अर्जुन में स्वाभाविक जिज्ञासा जागृत होती है और वह प्रश्न करता है कि हे प्रभु त्रिगुणातीत की क्या पहचान होती है ? उसके जीवन का  स्वरूप क्या होता है ? वह इन तीनों गुणों से परे कैसे पहुँचता है ?   

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