भगवद्गीता
बुधवार, 5 जुलाई 2017
गति का श्रोत
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जब व्यक्ति ऐसा महसूस करता है कि प्रत्येक गति इन गुणों की प्रेरणा से सृजित हो रहीं है और उसे भी जानता है जो कि इन गुणों की परिधि से परे है वह व्यक्ति मेरी समाहित दशा को प्राप्त करता है ।
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