भगवद्गीता
रविवार, 9 जुलाई 2017
उदासीन अकाम
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन के प्रश्नों का उत्तर देते हुये बोले हे पाण्डव (अर्जुन) त्रिगुणातीत व्यक्ति सत्व
,
रज़स् और तमस् के उत्पन्न होने पर ना ही उनकी उपस्थिति को बुरा मानता है और ना ही उनकी अनुपस्थिति में उनकी कामना करता है ।
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