शाश्वत् पद कि दशा को प्राप्ति के
लिये आर्हता को बताते हुये गुरू योगेश्वर अर्जुन को बताये कि जो लोग अभिमान और मोंह
से मुक्त हो गये हैं, जिन्होने बुरी आसक्तियों को जीत
लिया है, जिसकी सब इच्छाये शांत हो गई है, जो सदा परमात्मा की भक्ति में लगे रहते है, जो सुख और दु:ख के रूप से ज्ञात द्वैतों से
मुक्त हो गये हैं, और मूढता से रहित हो गये हैं, वे इस शाश्वत् पद की दशा को प्राप्त होते
हैं ।
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