भगवद्गीता
बुधवार, 1 नवंबर 2017
राजसिक कर्म
कर्म की गुणवत्ता को आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जिस कर्म को व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत इच्छा की पूर्ति हेतु
,
अथवा अपने अहंकार भाव की संतुष्टि हेतु
,
किसी फल विशेस को प्राप्त करने के लिये करता है उसे राजसिक कर्म कहा जाता है ।
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