शुक्रवार, 10 नवंबर 2017

विकृत रूप

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण बोले कि हे पार्थ (अर्जुन),  जिस बुद्धि के द्वारा अंधकार में समाहित हुआ व्यक्ति अधर्म को धर्म समझता है और सब बातो को एक विकृत रूप में देखता है, वह बुद्धि तामसिक होती है ।

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