गुरुवार, 30 नवंबर 2017

कार्य ही उपासना

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जो व्यक्ति, जिस ब्रम्ह से सभी जीवों की उत्पत्ति हुई है और जो समस्त रूप संसार में व्याप्त है, की उपासना, अपने कर्तव्य दायित्वों के सम्पादन के द्वारा करता है, उसे पूर्णता की स्थित प्राप्त होती है । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें