सोमवार, 13 नवंबर 2017

राजसिक धृति

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जिस धृति के द्वारा मनुष्य अपने कर्तव्य का सम्पादन, आनंद और सम्पत्ति से बँधा हुआ फलों की कामना से बँधा रहये करता है, हे पार्थ (अर्जुन) उसे राजसिक धृति कहा जाता है । 

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