भगवद्गीता
सोमवार, 13 नवंबर 2017
राजसिक धृति
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जिस धृति के द्वारा मनुष्य अपने कर्तव्य का सम्पादन
,
आनंद और सम्पत्ति से बँधा हुआ फलों की कामना से बँधा रहये करता है
,
हे पार्थ (अर्जुन) उसे राजसिक धृति कहा जाता है ।
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