भगवद्गीता
शनिवार, 18 नवंबर 2017
तामसिक सुख
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जो सुख आत्मा को आरम्भ से अंत तक भ्रम मे रखता है और जिसकी उत्पत्ति निद्रा
,
आलस्य और प्रमाद से होती है उसे तामसिक सुख कहा जाता है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें