रविवार, 5 नवंबर 2017

राजसिक कर्ता

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जो कर्ता मनोभावों से प्रभावित होता है, जो कर्मफल के लिये उत्सुक रहता है, जो लालची होता है, जो क्षतिपूर्ण वृत्ति का होता है, अपवित्र होता है, जो हर्ष और विषाद से विचलित होता है, उसे राजसिक कर्ता कहा जाता है ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें