भगवद्गीता
शुक्रवार, 3 नवंबर 2017
तामसिक कर्म
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जो कर्म अज्ञान के कारण हानि या हिंसा का विचार किये बिना और अपनी मानवीय क्षमता का विचार किये बिना किया जाता है
,
वह तामसिक कर्म कहलाता है ।
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