मंगलवार, 21 नवंबर 2017

चतुर्वर्ण

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि हे शत्रुओं के विजेता (अर्जुन), चाहे ब्राम्हण, चाहे क्षत्रिय, चाहे वैश्य और चाहे सूद्र मे भी, उनके कृत कर्मों को, उनके प्रकृति के गुणों के आधार पर ही पहचाना जाता है ।  

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें