शुक्रवार, 24 नवंबर 2017

अपेक्षित

गुरू द्वारा बताये गये ब्राम्हण के स्वाभाविक गुणों से विदित है कि यह ब्राम्हणत्व मात्र किसी विषेस कुल में जन्म की बात नहीं है अपितु कुछ निश्चित आर्हताओं के धारक व्यक्ति के लिये यह ब्राम्हण उपाधि निर्धारित की गई है । यदि किसी कुल विषेस में जन्मा व्यक्ति इन अपेक्षाओं की पूर्ति करता है तो वह सराहनीय और ग्राह्य माना जायेगा परंतु अन्यथा की परिस्थित में नहीं स्वीकारा जायेगा । 

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