शनिवार, 11 नवंबर 2017

अविचलित धृति

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि वह अविचलित धृति, जिसकी शक्ति से एकाग्रता द्वारा मनुष्य मस्तिष्क, प्राण, और इंद्रियों की गतिविधियों को नियंत्रण में रखता है, हे पार्थ (अर्जुन), वह धृति सात्विक प्रकार की होती है । 

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