मंगलवार, 14 नवंबर 2017

तामसिक धृति

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जिस धृति के द्वारा कोई मूर्ख व्यक्ति निद्रा, भय, शोक, विषाद और अभिमान को नहीं त्यागता, हे पार्थ (अर्जुन), वह तामसिक प्रकार की होती है । 

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