गुरु
योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन की मन:दशा को देखते हुये सर्वप्रथम उसे उस सम्प्रदाय का
स्मरण कराते है जिसमें उसका जन्म हुआ – आर्य कहकर । आर्य मर्यादित आचरण एवं
शालीन व्यवहार तथा स्पष्ट बुद्धि द्वारा सीधी अभिव्यक्ति के लिये जाने जाते हैं । कृष्ण
कहते हैं हे आर्य इस निर्णायक अवसर पर तुम्हारे द्वारा व्यक्त विचार आर्य
सम्प्रदाय के कुलीन, बीर योद्धा के अनुरूप नहीं हैं ।
तुम्हारा विषाद तुम्हे इस पृथ्वी पर अपयश देगा और स्वर्गलोक में स्थान मिलने के
अवसर पर बाधा बनेगा । हे अर्जुन इस अ-सामयिक विषाद को त्याग कर उठो अपना कर्तव्य
करो ।
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