बुधवार, 18 फ़रवरी 2015

उपदेश चरण 1

गुरु योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन की मन:दशा को देखते हुये सर्वप्रथम उसे उस सम्प्रदाय का स्मरण कराते है जिसमें उसका जन्म हुआ आर्य कहकर । आर्य मर्यादित आचरण एवं शालीन व्यवहार तथा स्पष्ट बुद्धि द्वारा सीधी अभिव्यक्ति के लिये जाने जाते हैं । कृष्ण कहते हैं हे आर्य इस निर्णायक अवसर पर तुम्हारे द्वारा व्यक्त विचार आर्य सम्प्रदाय के कुलीन, बीर योद्धा के अनुरूप नहीं हैं । तुम्हारा विषाद तुम्हे इस पृथ्वी पर अपयश देगा और स्वर्गलोक में स्थान मिलने के अवसर पर बाधा बनेगा । हे अर्जुन इस अ-सामयिक विषाद को त्याग कर उठो अपना कर्तव्य करो ।

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