गीता
के संदेश की सीमा समय और आकाश दोनों की सीमा से परे है । यह सर्वकाल में सत्य है
और पूरे मानव समाज के हित के अनुरूप है । अपने उत्थान के लिये प्रयत्नशील प्रत्येक
मनुष्य के लिये यह प्रभावी है । यह संदेश दुर्वृत्तियों के शमन और देवत्व की
पुनर्स्थापना के लिये है । मोंह का त्याग कठिन अवश्य होता है परंतु प्राप्त होने
वाले उच्चस्तरीय जीवन के लिये यह त्याग अनिवार्य होता है ।
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