गुरुवार, 12 फ़रवरी 2015

गीता का संदेश

गीता के संदेश की सीमा समय और आकाश दोनों की सीमा से परे है । यह सर्वकाल में सत्य है और पूरे मानव समाज के हित के अनुरूप है । अपने उत्थान के लिये प्रयत्नशील प्रत्येक मनुष्य के लिये यह प्रभावी है । यह संदेश दुर्वृत्तियों के शमन और देवत्व की पुनर्स्थापना के लिये है । मोंह का त्याग कठिन अवश्य होता है परंतु प्राप्त होने वाले उच्चस्तरीय जीवन के लिये यह त्याग अनिवार्य होता है । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें