शनिवार, 7 फ़रवरी 2015

मोंह बंधन

यदि जीवन में आदर्श हासिल करना है, न्याय और प्यार पाना है, तो हमें मोंह को त्यागने में होने वाले दु:खों को झेलना होगा, पीडा को बर्दाश्त करना होगा । अर्जुन को युद्ध सम्मुख होते ही अनिश्चय का सामना करना पडा था । कारण उसका प्रकृतीय मोंह था । उसको प्रकृति की आसक्ति याद आ रही थी जो उसे युद्ध से विमुख होने को प्रवृत्त कर रही थी । वह जो मुख से स्वजनो और सगे सम्बंधियों की त्रासदा की बाते कर रहा था इसमें उसका उनके प्रति प्रेम नहीं था अपितु वह अपने स्वयं के मोंह को त्यागने में अपने को असमर्थ पा रहा था । 

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