शनिवार, 14 फ़रवरी 2015

ब्रम्हविद्या

परम् सत्य का विज्ञान । परम् सत्य क्या है ? इस संसार में प्रतिपल घटित हो रहे परिवर्तन ही सत्य है अथवा इन समस्त परिवर्तनों के परोक्ष में कोई अपरिवर्तनीय सत्य विद्यमान है ? वह कौन सा अस्तित्व है जिससे संसार के समस्त रूप प्रगट हुये हैं ? इस अनंत सम्भावनाओं के संसार के समस्त परिवर्तनों को गतिमान रखने वली सत्ता क्या है ? क्या इन समस्त परिवर्तनों के पृष्ठभूमि में कोई लक्ष्य निहित है अथवा क्या इन परिवर्तनों का कोई अर्थ है ? परम् सत्य के प्रकृति का ज्ञान कराना बोध कराना ब्रम्हविद्या का लक्ष्य होता है । तर्क द्वारा उत्पन्न होने वाले प्रश्नों के पथ से अग्रसर होने पर ब्रम्हज्ञान का पथ है । विद्वान शंकर का मत है कि जिस प्रकार प्रकाश के माध्यम से हम संसार के समस्त रूपों को देखते हैं उसी प्रकार तर्क द्वारा उत्पन्न होने वाले प्रश्नों के माध्यम से ब्रम्ह का अनुभव पाया जा सकता है । 

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