युद्ध के मैदान में जब दोनो पक्ष की सेनायें युद्ध के लिये तत्पर हो सामने
सामने खडी हुई और शंख नाद द्वारा सभी ने अपनी युद्ध के प्रति तत्परता और तैयारी को
पूर्ण व्यक्त किया तो अर्जुन को अत्यधिक मानसिक पीडा की अनुभूति हुई । उसने अपने
स्वयं के विश्लेषण में यह पाया कि अब तक के जीवन के सम्बंधों के जो मूल्य थे वह सब
युद्ध में तोडने होंगे । यहीं मोंह का त्यागना पीडा का कारण था । परंतु विडम्बना
यह है कि बिना मोंह त्यागे नया जीवन मिलेगा ही नहीं ।
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