रविवार, 1 फ़रवरी 2015

अर्जुन की पीडा

युद्ध के मैदान में जब दोनो पक्ष की सेनायें युद्ध के लिये तत्पर हो सामने सामने खडी हुई और शंख नाद द्वारा सभी ने अपनी युद्ध के प्रति तत्परता और तैयारी को पूर्ण व्यक्त किया तो अर्जुन को अत्यधिक मानसिक पीडा की अनुभूति हुई । उसने अपने स्वयं के विश्लेषण में यह पाया कि अब तक के जीवन के सम्बंधों के जो मूल्य थे वह सब युद्ध में तोडने होंगे । यहीं मोंह का त्यागना पीडा का कारण था । परंतु विडम्बना यह है कि बिना मोंह त्यागे नया जीवन मिलेगा ही नहीं ।

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