भगवद्गीता
में परम् सत्य का विज्ञान ब्रम्हविद्या, तथा उस परम् सत्य का वास्तविक अनुभव
पाने का पथ योगशास्त्र दोनों ही श्रीकृष्ण और अर्जुन के संवाद के माध्यम द्वारा
प्रस्तुत किये गये हैं । अर्जुन आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिये एक निष्ठावन
जिज्ञासु है । गुरु श्रीकृष्ण उसे परम् सत्य का दर्शन एवं उसका साक्षात् पाने
का पथ भी बताते है ।
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