बुधवार, 25 फ़रवरी 2015

उपदेश चरण 4

गुरु योगेश्वर श्रीकृष्ण एक उदाहरण के द्वारा मोहासक्त अर्जुन को बताते हैं कि जिस प्रकार शरीर का शिशु अवस्था से युवावस्था में परिवर्तन होता है पुन: वृद्धावस्था में परिवर्तन होता है उसी प्रकार आत्मा का एक शरीर से दूसरे शरीर में परिवर्तन होता है । इसलिये संत पुरुष मृत्यु का शोक नहीं करते हैं । व्याख्याकार बताता है कि ज्ञान प्राप्ति के जिज्ञासुओं की ज्ञान प्राप्ति की यात्रा कई कई जन्मों में पूरी होति है । मृत्यु से आत्मा प्रभावित नहीं होती है ।

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