सोमवार, 23 फ़रवरी 2015

उपदेश चरण 3 : व्याख्या 1

इस रूपों के संसार के लिये बहु संख्यक आत्माधारी एक रचनागत सत्य हैं । प्रत्येक रूप का उदय शून्य से अस्तित्व स्वरूप पर्यंत हुआ है । असत् से सत् पर्यन्त । सभी रूपों का आधार ब्रम्ह है जबकि ब्रम्ह कोई रूप नहीं होता है । ब्रम्ह से समय की उत्पत्ति हुई है और समय का विलय ब्रम्ह में होता है । इस आधार पर प्रत्येक आत्मा अनादि काल से है और अनंत काल पर्यंत रहेगी । 

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