इस
मनुष्य शरीर के सृजन का कंचिद लक्ष्य भौतिक सुखों को खोजना अथवा यत्न करके पाना
नहीं होता है । यह भौतिक सुख तो यदि कोई प्रयत्न करके हासिल भी कर लेवे तो भी उसे
छोडना ही पडेगा । वृद्धावस्था के प्राप्त होने पर, शरीर जीर्ण होने पर और अंत में मृत्यु होने
पर । इसलिये यदि कोई अपने जीवन के सार्थक प्रयत्न इन भौतिक सुखों को पाने के लिये
करता है तो उसके प्रयत्नो को नष्ट होना निश्चित ही है ।
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