बुधवार, 4 मार्च 2015

उपदेश चरण 11

गुरो योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को आत्मा के सम्बंध में बताते हुये कहते हैं इसे युद्धास्त्रों द्वारा आहत् नहीं किया जा सकता, अग्नि द्वारा जलाया नहीं जा सकता, पानी द्वारा इसे गीला नहीं किया जा सकता, वायु इसे सुखा नहीं सकती, यह सभी को वेध सकता है परंतु इसे कोई वेध नहीं सकता है । यह सदैव एक ही है । इसे ज्ञानेंद्रियों द्वारा जाना नहीं जा सकता है । प्रकृति के जिन परिवर्तनों के द्वारा मस्तिष्क, शरीर, और प्राण प्रभावित होते हैं उनसे यह प्रभावित नहीं होता है । इसलिये अविनासी के लिये शोक करना योग्य नही है । 

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