गुरू
योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को वर्तमान परिस्थिति में युद्ध में सम्मलित होना
उसके लिये धर्मवत् आचरण के रूप में बताया । व्याख्याकार इसे स्पष्ट करते हुये
महाभारत के उद्योगपर्व में वर्णित गुरू के कथन का संदर्भ देकर बताया कि सिद्धयोगी
सन्यास द्वारा और कुलीन क्षत्रीय युद्ध में संघर्ष द्वारा ब्रम्हलोक में स्थान
पाने के लिये योग्यपात्र बनते हैं । इसका विलोम की स्थिति कि जब सत्य और असत्य का
युद्ध हो रहा हो तो इस युद्ध से विमुख होने वाला पाप का भागीदार बनेगा ।
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